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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में एक कपल की संरक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए उन पर 25 हजार रूपये जुर्माना लगा दिया…………………

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में एक कपल की संरक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए उन पर 25 हजार रूपये जुर्माना लगा दिया। इस याचिका में दावा किया गया था कि उनकी शादी हो चुकी है क्योंकि उन्होंने मालाओं का आदान-प्रदान किया है और एक होटल के कमरे में एक बर्तन में आग लगाकर ''सप्तपदी'' (सात फेरे लिए) की थी।

यह देखते हुए कि कोई 'वैध विवाह' नहीं हुआ है और याचिकाकर्ताओं ने अदालत को गुमराह करने की कोशिश की है न्यायमूर्ति गुरविंदर सिंह गिल की पीठ ने हालांकि, पुलिस आयुक्त, पंचकुला को इस मामले और सुरक्षा की मांग करने वाले उनके प्रतिनिधित्व पर विचार करने का निर्देश दिया संक्षेप में मामला याचिकाकर्ता नंबर 1 (लड़की) की उम्र 20 साल और याचिकाकर्ता नंबर 2 (लड़का) की उम्र 19 साल और 5 महीने है। उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया और प्रतिवादी नंबर 4 से 8 (लड़की के रिश्तेदारों) से खतरे की आशंका व्यक्त करते हुए अपने जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा की मांग की क्योंकि उन्होंने लड़की के परिजनों की मर्जी के खिलाफ शादी की है।

उन्होंने दावा किया कि 26 सितंबर, 2021 को अपने घरों से भागकर उन्होंने शादी कर ली, हालांकि, न तो कोई विवाह प्रमाण पत्र संलग्न किया गया और न ही उनकी याचिका में शादी की कोई तस्वीर संलग्न की इसे देखते हुए, कोर्ट ने उन्हें उनकी शादी के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने का अवसर दिया और इसलिए, उन्होंने अदालत में प्रस्तुत किया कि वे एक होटल में रुके थे और वहाँ कमरे में ही लड़के ने कन्या के माथे पर सिंदूर लगाया और एक-दूसरे को माला पहनाई।

जिसके बाद एक बर्तन में आग जलाकर ''सप्तपदी'' की गई। हालांकि यह भी कहा गया कि ''सप्तपदी'' के दौरान किसी के द्वारा कोई मंत्र नहीं पढ़े गए।


कोर्ट की टिप्पणियां कोर्ट ने शुरूआत में कहा कि याचिकाकर्ता नंबर 2 (लड़का) विवाह योग्य उम्र का नहीं है और उन्होंने यह कहकर कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास किया है कि उन्होंने शादी कर ली है।


कोर्ट ने आगे कहा कि उपरोक्त स्पष्टीकरण इस तथ्य को छिपाने का प्रयास प्रतीत होता है कि वास्तव में याचिकाकर्ताओं के बीच कोई वैध विवाह नहीं हुआ है,जबकि याचिका में ऐसा कहा गया है कि उनका विवाह हो चुका है।


कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने साफ नियत के साथ न्यायालय का दरवाजा नहीं खटखटाया और न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया है, इसलिए न्यायालय याचिकाकर्ताओं पर 25000 रूपये जुर्माना लगा रहा है। यह राशि हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी में जमा करा दी जाए।


चूंकि याचिकाकर्ताओं को उनके जीवन और स्वतंत्रता के लिए खतरा है, इसलिए न्यायालय ने जोर देकर कहा कि वह याचिकाकर्ताओं के जीवन और स्वतंत्रता को सुरक्षित और संरक्षित करने के अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हट सकता है।

मामले में दायर याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने पुलिस आयुक्त, पंचकूला को निर्देश दिया है कि वह मामले और उनके प्रतिनिधित्व पर विचार करे।


इसे देखते हुए, कोर्ट ने उन्हें उनकी शादी के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने का अवसर दिया और इसलिए उन्होंने अदालत में प्रस्तुत किया कि वे एक होटल में रुके थे और वहाँ कमरे में ही लड़के ने कन्या के माथे पर सिंदूर लगाया और एक-दूसरे को माला पहनाई।

जिसके बाद एक बर्तन में आग जलाकर ''सप्तपदी'' की गई। हालांकि यह भी कहा गया कि ''सप्तपदी'' के दौरान किसी के द्वारा कोई मंत्र नहीं पढ़े गए।


कोर्ट की टिप्पणियां :- कोर्ट ने शुरूआत में कहा कि याचिकाकर्ता नंबर 2 (लड़का) विवाह योग्य उम्र का नहीं है और उन्होंने यह कहकर कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास किया है कि उन्होंने शादी कर ली है।


कोर्ट ने आगे कहा कि उपरोक्त स्पष्टीकरण इस तथ्य को छिपाने का प्रयास प्रतीत होता है कि वास्तव में याचिकाकर्ताओं के बीच कोई वैध विवाह नहीं हुआ है,जबकि याचिका में ऐसा कहा गया है कि उनका विवाह हो चुका है।


कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने साफ नियत के साथ न्यायालय का दरवाजा नहीं खटखटाया और न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया है, इसलिए न्यायालय याचिकाकर्ताओं पर 25000 रूपये जुर्माना लगा रहा है। यह राशि हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी में जमा करा दी जाए।


चूंकि याचिकाकर्ताओं को उनके जीवन और स्वतंत्रता के लिए खतरा है, इसलिए न्यायालय ने जोर देकर कहा कि वह याचिकाकर्ताओं के जीवन और स्वतंत्रता को सुरक्षित और संरक्षित करने के अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हट सकता है।

मामले में दायर याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने पुलिस आयुक्त, पंचकूला को निर्देश दिया है कि वह मामले और उनके प्रतिनिधित्व पर विचार करे।


कोर्ट ने कहा कि यदि यह पाया जाता है कि याचिकाकर्ताओं के जीवन और स्वतंत्रता के लिए एक वास्तविक खतरा है, तो कानून के तहत आवश्यक कदम जल्द से जल्द उठाए जाएं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि याचिकाकर्ताओं को कोई नुकसान न हो।








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