पूर्व में प्रस्तुत अवमानना याचिका में आवेदन दिया है।
नगर निगम से क्षतिपूर्ति दण्ड वसूला जाने, अधिकारियों के चरिभावली में दर्ज हो ।
जबलपुर के मास्टर प्लान में उल्लेखित महत्वपूर्ण जात संग्राहक
सुपातास एवं हनुमानताल में गंदगी समा जाने में इन तालावों का
जस दुबित हुआ है, यह नगर निगम की लापरवाही है, अतः यह
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों की अवमानना है, यह आवेदन डॉ. पी. जी. नाजपांडे तथा रजत भार्गव की ओर से एङ प्रभात यादव ने एनजीटी में पूर्व मेही वाटर बॉडीज के जल प्रदुषण संबंध में जारी अवमानना याचिका में प्रस्तुत किया है।
उद्देखनिय है की डॉ. पी. जी. नाजपोडे रारा दायर याचिका - ओ. ए. 105/2017 में दि. 6-7-2020 दो एनजीटी ने आदेश दिये है की वाटर बॉडीज में दुषित जल एवं अवशिष्ठ जाने झें हो रहे प्रदुषण पर रोक लगाये, इस आदेश का उछृंघन करने वाले स्थानिय निकामे एवं नीजी व्यक्तियों से प्रतिपुर्ति वसूला जाये, दोषी अधिकारीयों के वार्षिक चरित्रावली में नाकामयाबी दर्ज करे, किंतु एनजीरी के इस आदेश का पालन नहीं किया तथा वाटर बॉडीज में जस प्रदुषण होना जारी है, अतः अवमानना याचिका दायर की गई थी।
एड प्रभाव यादव ने आवेदन में बताया की सुपाताळ तथा हनुमानताल में आजुबाजुड़े रहवासी क्षेत्र का घरेबु दुषित जल तथा गैस अपशिष्ठ निस्सारित होने कारण तालाव जब प्रदुषित हुआ है। सुपाताल मे तो मछलिया भर रही है। हनुमानतात. जल प्रदुषण पर शिकायत की गई थी, जिस पर परिक्षण के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पाया की जल सी " ग्रेड तक का है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें