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अधिवक्ता कल्याण निधी की राशि से 50 प्रतिशत की राशि प्रदान किये जाने अथवा उक्त राशि ऋण के रूप में प्रदान किये जाने की मांग.........?

जैसा कि आपको विदित है कि मार्च 2020 से विधि व्यवसाय लगभग बंद पड़ा है, एवं अधिवक्ताओं का एक बड़ा वर्ग इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ है, क्योंकि जिन अधिवक्ताओं का विधि व्यवसाय उनके भरण-पोषण का साधन है, इस महामारी से पूरी तरह टूट चुका है, 

अधिवक्ता नियमावली के कारण वह कोई अन्य व्यवसाय भी नहीं कर सकता है, इस विषम स्थिति में अधिवक्ताओं का परिवार भी स्वाथ्य एवं आर्थिक कारणों के कारण अवसाद में है।

महोदय, ये बातें सर्वविदित है, एवं इस ज्ञापन में इसका उल्लेख करना एक मात्र औपचारिकता है, इस महामारी में हमारे अनेको अधिवक्तागणों का स्वर्गवास भी हो चुका है, उन अधिवक्तागणों के परिवारजन आज किस दयनीय अवस्था में है, यह उल्लेख किया जाना, इस पत्र में शब्दों के माध्यम से संभव नहीं है। यह महामारी बहुत ही गंभीर और भयावह है, जिसका समय पर उपचार होना आवश्यक है, और प्रायवेट अस्पतालों में उपचार अत्यंत महंगा है, 
अब तक जिन अधिवक्ताओं के पास जो भी जमा पूंजी थी, सब समाप्त हो चुकी है, अब तो कुछ अधिवक्ताओं के समक्ष भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है, लगभग 2 वर्ष से आर्थिक तंगी से जूझ रहें है, अतः यह आर्थिक तंगी की इंतहा है, यह लावा अब न जाने किस रूप में फूट जायें, और जो संदेश समाज में जायें, वह समय अधिवक्ता जगत एवं राज्य अधिवक्ता परिषद के लिये शर्म का विषय न बन जायें।

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