संस्था द्वारा नियुक्त वॉलेंटियर्स दिव्यांगजन का registration कर फार्म भरने में सहायता करेंगे। दूरस्थ अंचलों के दिव्यांगों के कोविड वैक्सीनेशन, वाहन न होने की स्थिति में वैक्सीनेशन स्थल तक लाने-ले जाने के लिये वाहन, एम्बुलेंस व्यवस्था, राशन और नित्य उपयोग में आने वाली वस्तुओं को भी उपलब्ध कराने में मदद करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर अंतिम संस्कार में भी सहायता की जायेगी। हेल्पलाइन सुबह 8 बजे से रात्रि 8 बजे तक उपलब्ध रहेगी।
चेक बाउंस केस में सज़ा होने पर क्या किया जाए ……..? चेक बाउंस के केस में निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट ,1881 की धारा 138 के अंतर्गत 2 वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है। लेकिन यह इस अपराध में अधिकतम सज़ा है , अदालत साधारणतः से 6 MONTH या फिर 7 YEAR तक का कारावास देती है इसके साथ ही अभियुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 357 के अंतर्गत परिवादी को प्रतिकर दिए जाने हेतु भी निर्देशित किया जाता है। यह प्रतिकर चेक राशि का दुगना भी हो सकता है। सज़ा होने पर अभियुक्त ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपील अवधि तक सज़ा को निलंबित किये जाने हेतु दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 389(3) के अंतर्गत एक आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकता है। किसी भी जमानती अपराध में जमानत लेना अभियुक्त का अधिकार होता है इसलिए इस अपराध के अंतर्गत अभियुक्त को दी गई सज़ा को निलंबित कर दिया जाता है फिर यह सजा तब तक निलंबित रहती है जब तक अपील पर अदालत अपना अंतिम निर्णय नहीं दिए देती है। अंतिम निर्णय में भी यदि अपीलार्थी दोषी पाया जाता है तो अपील अदालत सज़ा को बरकरार रखते हुए अपना निर्णय दिए देती है। सत्र न्यायालय से भी सज़ा बरकरार रहन...
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