lockdown के दौरान स्कूलों के संचालन खर्च में बचत हुई सुविधाओं का उपयोग नहीं करने पर छात्रों से उसकी फीस नहीं ले सकते': सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की खंडपीठ ने indian school , जोधपुर बनाम राजस्थान राज्य और अन्य मामले में यह फैसला सुनाया। पीठ राजस्थान सरकार के उस आदेश को चुनौती देने वाली अपीलों के एक बैच पर सुनवाई कर रही थी, जिसने राज्य के cbse स्कूलों को केवल 70% और राज्य बोर्ड स्कूलों को वार्षिक स्कूल फीस का केवल 60% इकट्ठा करने की अनुमति दी गई थी।
lockdown के दौरान स्कूलों के संचालन खर्च में बचत हुई सुविधाओं का उपयोग नहीं करने पर छात्रों से उसकी फीस नहीं ले सकते suprem court कोर्ट ने कहा है कि निजी स्कूलों द्वारा लॉकडाउन के दौरान छात्रों द्वारा स्कूल गतिविधियों और सुविधाओं का उपयोग नहीं करने पर भी फीस की मांग करना मुनाफाखोरी और व्यावसायीकरण है। court इस तथ्य ध्यान दिया कि पिछले शैक्षणिक वर्ष के दौरान कक्षाएं ऑनलाइन आयोजित की गई हैं। इससे देखते हुए suprem court ने कहा कि कोर्ट ने आगे कहा कि हम यह मानते हैं कि स्कूल प्रबंधन की स्कूल द्वारा निर्धारित वार्षिक school लगभग 15 % बचत हुई होगी। इसलिए गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के फीस में 15 प्रतिशत कटौती करने का आदेश दिया गया है। शैक्षणिक संस्थान शिक्षा प्रदान करने और चैरिटेबल का काम कर रहे हैं। उन्हें स्वेच्छा से और लगातार फीस कम करनी चाहिए।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें