वायरस के उच्च स्तर के प्रसार को देखते हुए तीसरी लहर आना अनिवार्य है लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह तीसरी लहर कब आएगी और किस स्तर की होगी। उन्होंने कहा कि हमें नई लहरों के लिए तैयार रहना चाहिए। सरकार ने बताया कि एक मई से, नौ राज्यों में 18-44 आयु समूह के 6.71 लाख लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाया गया है।नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे कोरोना वायरस से संक्रमित होकर घर में क्वारंटीन में रह रहे लोगों और परिवारों को टेलीफोन पर परामर्श देने के लिए आगे आएं। dr. pal ने कहा कि बदलते virus की प्रतिक्रिया समान रहती है। हमें कोविड-उपयुक्त व्यवहार अपनाने की जरूरत है, जैसे मास्क लगाना, दूरी बनाना, स्वच्छता, गैर जरूरी मुलाकातें नहीं करना और घर में ही रहना।
चेक बाउंस केस में सज़ा होने पर क्या किया जाए ……..? चेक बाउंस के केस में निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट ,1881 की धारा 138 के अंतर्गत 2 वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है। लेकिन यह इस अपराध में अधिकतम सज़ा है , अदालत साधारणतः से 6 MONTH या फिर 7 YEAR तक का कारावास देती है इसके साथ ही अभियुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 357 के अंतर्गत परिवादी को प्रतिकर दिए जाने हेतु भी निर्देशित किया जाता है। यह प्रतिकर चेक राशि का दुगना भी हो सकता है। सज़ा होने पर अभियुक्त ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपील अवधि तक सज़ा को निलंबित किये जाने हेतु दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 389(3) के अंतर्गत एक आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकता है। किसी भी जमानती अपराध में जमानत लेना अभियुक्त का अधिकार होता है इसलिए इस अपराध के अंतर्गत अभियुक्त को दी गई सज़ा को निलंबित कर दिया जाता है फिर यह सजा तब तक निलंबित रहती है जब तक अपील पर अदालत अपना अंतिम निर्णय नहीं दिए देती है। अंतिम निर्णय में भी यदि अपीलार्थी दोषी पाया जाता है तो अपील अदालत सज़ा को बरकरार रखते हुए अपना निर्णय दिए देती है। सत्र न्यायालय से भी सज़ा बरकरार रहन...
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