इटली के ISS नेशनल हेल्थ इंस्टिट्यूट के साथ मिलकर काम कर रहे शोधकर्ताओं ने इस स्टडी के लिए कोरोना वायरस के लक्षण वाले 162 मरीजों का चुनाव किया था जिन्हें पिछले साल आई कोरोना की लहर के दौरान संक्रमण हुआ था इनके blood सैंपल सबसे पहले पहले मार्च और अप्रैल में लिए गए इसके बाद जो मरीज कोरोना की जंग जीत चुके हैं उनके ब्लड सैंपल नवंबर में दोबारा लिए गए ISS के साथ साझा बयान में शोधकर्ताओं ने बताया कि कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद अगले आठ महीनों तक इन मरीजों के शरीर में बीमारी से लड़ने वाले एंटीबॉडीज पाए गए।शोधकर्ताओं की इस स्टडी को नेचर कॉम्यूनिकेशन्स साइंटिफिक जर्नल में प्रकाशित किया गया है शोध में पाया गया है कि कुछ मरीजों में एंटीबॉडी और दिन तक बनी रही स्टडी में शोधकर्ताओं ने corona virus से रिकवरी में एंटीबॉडीज के विकसित होने की महत्व पर भी काफी जोर दिया है।
चेक बाउंस केस में सज़ा होने पर क्या किया जाए ……..? चेक बाउंस के केस में निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट ,1881 की धारा 138 के अंतर्गत 2 वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है। लेकिन यह इस अपराध में अधिकतम सज़ा है , अदालत साधारणतः से 6 MONTH या फिर 7 YEAR तक का कारावास देती है इसके साथ ही अभियुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 357 के अंतर्गत परिवादी को प्रतिकर दिए जाने हेतु भी निर्देशित किया जाता है। यह प्रतिकर चेक राशि का दुगना भी हो सकता है। सज़ा होने पर अभियुक्त ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपील अवधि तक सज़ा को निलंबित किये जाने हेतु दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 389(3) के अंतर्गत एक आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकता है। किसी भी जमानती अपराध में जमानत लेना अभियुक्त का अधिकार होता है इसलिए इस अपराध के अंतर्गत अभियुक्त को दी गई सज़ा को निलंबित कर दिया जाता है फिर यह सजा तब तक निलंबित रहती है जब तक अपील पर अदालत अपना अंतिम निर्णय नहीं दिए देती है। अंतिम निर्णय में भी यदि अपीलार्थी दोषी पाया जाता है तो अपील अदालत सज़ा को बरकरार रखते हुए अपना निर्णय दिए देती है। सत्र न्यायालय से भी सज़ा बरकरार रहन...
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