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आज तक कोई भी वैज्ञानिक आत्मा के होने का वैलिड प्रूफ नही दे पाया.................read and share thk.....

आज तक कोई भी वैज्ञानिक आत्मा के होने का वैलिड प्रूफ नही दे पाया। 
आज तक किसी डॉक्टर ने आत्मा के लिए दवा दी ? नही क्योंकि आत्मा होती ही नहीं। 
मरने के बाद कोई आत्मा नही भाग जाती, बस ये आपका दिमाक है जो काम करना बंद कर देता है। 
हमारे दिमाक में रसायन होते है, डोपामाइन नाम का रसायन अगर निकाल दिया जाए तो हम कभी खुसी महसूस नही करेंगे, तो क्या आत्मा हँसना भूल जाएगी ?
बायोलॉजी, केमिस्ट्री और मॉलिक्यूलर फिसिक्स की मदद से हम बहुत करीब खड़े है नया जीवन बनाने में, कुछ शोध बाकी है बस।हम दिल का प्रत्यारोपण कर लेते है, एक का दिल दूसरे में, तो क्या आत्मा दिल मे होती है जो दूसरे शरीर मे चली जाती है ? अगर आत्मा दिल मे होती तो दिमाक निकाल लेने से आदमी मरना नही चहिय्ये क्योंकि दिल है उसमें आत्मा है, पर नही शरीर से कुछ भी कम हुवा और शरीर मृत। तो क्या सब अंगों में अलग अलग आत्मा होती है ? तो मानव अंग तो हम बना चुके है स्टेम सेल से कई मानव अंग बना चुके है हम। लिवर, दिल, किडनी जैसी चीज़े जरूरत नही होगी दुसरो से लेनी की ,लैब में बना रहे। अगर हर अंग में आत्मा होती तो लैब में कैसे बना पाते मानव अंग ?  पूरे शरीर को खोल चुके है हम, कही भी प्रमाण नही मिला कि यहाँ आत्मा रहती होगी। 
आपमे जो चेतना है वो दिमाक के कारण है। क्लीनिकल मृत्यु डॉक्टर घोसित करते है जब दिल धड़कना बन्द हो, साँसे रुक जाए,
 और खून का बहाव न हो, लेकिन किडनी और आंखे जीवित होती है। इसके 4 से 6 मिनट में बायोलॉजिकल डेथ होती है जिसमे ऑक्सीजन न मिलने के कारण दिमाक की कोशिकाएं टूटने लगती है, फिर दूसरे अंग।
अंग दान किये जाते है, मरने के बाद आत्मा तो निकल गयी फिर अंग दान कैसे करते है ? 
अमीबा एक कोशकीय जीव है जो दो भागों में टूट जाता है, एक अमीबा था तो आत्मा भी एक ही होगी फिर दो भागों में बटने में दोनों भागो में आत्मा कैसे हो गई ? 

इसलिए आत्मा जैसी कोई चीज़ नही। सिर्फ आपका अज्ञान है। स्वर्ग नरक का लालच और डर के कारण आत्मा की रचना की गई थी

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