जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, जबलपुर ने अधिवक्ताओं से संयम बरतने की अपील की है। कोविड गाइडलाइन का पालन अनि वार्यताः करने और किसी तरह की लापरवाही न बरतने पर बल दिया गया है। सचिव मनीष तिवारी ने बताया कि हाई कोर्ट का स्टाफ व अधिवक्ता वर्ग काफी संख्या में संक्रमित हो चुका है। लिहाजा, समझदारी इसी में है कि दूसरों को संक्रमण का शिकार न होने दें । अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें और जब ठीक महसूस हो तभी घर से निकलें। लाकडाउन का पूरी ईमानदारी से खुद भी पालन करें और दूसरों को भी समझाइश दें। वकालत एक नोबल प्रोफेशन है, जिसके सदस्यों को समाज का मार्गदर्शन करना चाहिए।
चेक बाउंस केस में सज़ा होने पर क्या किया जाए ……..? चेक बाउंस के केस में निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट ,1881 की धारा 138 के अंतर्गत 2 वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है। लेकिन यह इस अपराध में अधिकतम सज़ा है , अदालत साधारणतः से 6 MONTH या फिर 7 YEAR तक का कारावास देती है इसके साथ ही अभियुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 357 के अंतर्गत परिवादी को प्रतिकर दिए जाने हेतु भी निर्देशित किया जाता है। यह प्रतिकर चेक राशि का दुगना भी हो सकता है। सज़ा होने पर अभियुक्त ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपील अवधि तक सज़ा को निलंबित किये जाने हेतु दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 389(3) के अंतर्गत एक आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकता है। किसी भी जमानती अपराध में जमानत लेना अभियुक्त का अधिकार होता है इसलिए इस अपराध के अंतर्गत अभियुक्त को दी गई सज़ा को निलंबित कर दिया जाता है फिर यह सजा तब तक निलंबित रहती है जब तक अपील पर अदालत अपना अंतिम निर्णय नहीं दिए देती है। अंतिम निर्णय में भी यदि अपीलार्थी दोषी पाया जाता है तो अपील अदालत सज़ा को बरकरार रखते हुए अपना निर्णय दिए देती है। सत्र न्यायालय से भी सज़ा बरकरार रहन...
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