कोरोना संक्रमण से उपजे हालात को देखते हुए कोरोना संक्रमण से उपजे हालात को देखते हुए बैंकों के समय में भी बदलाव किया गया है। राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी एसएलबीसी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई बैठक में मंगलवार को अहम निर्णय लिया गया। इसके तहत अब प्रदेश भर के बैंकों का समय सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक ही रहेगा। मतलब कोरोना काल के दौरान रोजाना महज 4 घंटे के लिए ही लोगों को बैंकिंग सुविधाएं मुहैया हो सकेगी। यह आदेश 22 अप्रैल से लागू होगा और 15 मई तक प्रभावी रहेगा। है। राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी एसएलबीसी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई बैठक में मंगलवार को अहम निर्णय लिया गया। इसके तहत अब प्रदेश भर के बैंकों का समय सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक ही रहेगा। मतलब कोरोना काल के दौरान रोजाना महज 4 घंटे के लिए ही लोगों को बैंकिंग सुविधाएं मुहैया हो सकेगी। यह आदेश 22 अप्रैल से लागू होगा और 15 मई तक प्रभावी रहेगा।
चेक बाउंस केस में सज़ा होने पर क्या किया जाए ……..? चेक बाउंस के केस में निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट ,1881 की धारा 138 के अंतर्गत 2 वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है। लेकिन यह इस अपराध में अधिकतम सज़ा है , अदालत साधारणतः से 6 MONTH या फिर 7 YEAR तक का कारावास देती है इसके साथ ही अभियुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 357 के अंतर्गत परिवादी को प्रतिकर दिए जाने हेतु भी निर्देशित किया जाता है। यह प्रतिकर चेक राशि का दुगना भी हो सकता है। सज़ा होने पर अभियुक्त ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपील अवधि तक सज़ा को निलंबित किये जाने हेतु दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 389(3) के अंतर्गत एक आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकता है। किसी भी जमानती अपराध में जमानत लेना अभियुक्त का अधिकार होता है इसलिए इस अपराध के अंतर्गत अभियुक्त को दी गई सज़ा को निलंबित कर दिया जाता है फिर यह सजा तब तक निलंबित रहती है जब तक अपील पर अदालत अपना अंतिम निर्णय नहीं दिए देती है। अंतिम निर्णय में भी यदि अपीलार्थी दोषी पाया जाता है तो अपील अदालत सज़ा को बरकरार रखते हुए अपना निर्णय दिए देती है। सत्र न्यायालय से भी सज़ा बरकरार रहन...
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