आज तक इस धरती पर ऐसा कोई सफल व्यक्ति नहीं हुआ, जिसकी उसके समकालीन लोगों ने निन्दा या आलोचना नहीं की होगी । महान व्यक्ति जैसे श्रीराम, ईसा, बुद्ध, सुकरात, कृष्ण कोई भी आलोचना से नहीं बच पाये ।
आलोचना से वही बच सकता है जो बिल्कुल निकम्मा, निरुपयोगी व बेकार व्यक्ति हो । फल वाले वृक्षों पर ही पत्थर फैंके जाते हैं, कंटीली झाड़ियों पर नहीं । लोगों द्वारा आलोचना किया जाना आपके सफल और सक्षम व्यक्तित्व का प्रमाण है।
आप निश्चिंत होकर वहीं कीजिये जिसे आप उचित समझते हैं और निन्दा की परवाह न कीजिये ।
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