सीएम ने बताया कि मैं आज चुनाव प्रचार के लिए रोड शो के माध्यम से दमोह में आपके बीच आ रहा था, लेकिन कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है, संकट विकट है। मुझे कई व्यवस्थाओं का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन का इंतजाम चुनौती है। मैं इससे इनकार नहीं करता। 13 अप्रैल को 272 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत थी, आज 280 मीट्रिक टन उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन के इंतजाम में केंद्र सरकार सहयोग कर रही है, लेकिन समस्या सभी जगह है। रेल मंत्री पीयूष गोयल से भी चर्चा हुई है, जरूरत पड़ने पर राउरकेला और भिलाई आदि से रेल द्वारा ऑक्सीजन सिलेंडर बुलवाए जाएंगे। ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर की 8 यूनिट लगा रहे हैं, जिसमें से 4 यूनिट का काम पूरा हो गया है। बता दें कि सरकार ने 2 हजार ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर मशीन खरीदने का निर्णय लिया है। इसमें से 180 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर मशीनें मिल गई है। उज्जैन, शिवपुरी, सिवनी और खंडवा में यह शुरू हो गई हैं। प्रदेश में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी नहीं है। प्रदेश को यह 21 हजार डोज प्राप्त हो चुके हैं, 15 अप्रैल को 12 हजार अतिरिक्त डोज मिलेंगे।
चेक बाउंस केस में सज़ा होने पर क्या किया जाए ……..? चेक बाउंस के केस में निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट ,1881 की धारा 138 के अंतर्गत 2 वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है। लेकिन यह इस अपराध में अधिकतम सज़ा है , अदालत साधारणतः से 6 MONTH या फिर 7 YEAR तक का कारावास देती है इसके साथ ही अभियुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 357 के अंतर्गत परिवादी को प्रतिकर दिए जाने हेतु भी निर्देशित किया जाता है। यह प्रतिकर चेक राशि का दुगना भी हो सकता है। सज़ा होने पर अभियुक्त ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपील अवधि तक सज़ा को निलंबित किये जाने हेतु दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 389(3) के अंतर्गत एक आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकता है। किसी भी जमानती अपराध में जमानत लेना अभियुक्त का अधिकार होता है इसलिए इस अपराध के अंतर्गत अभियुक्त को दी गई सज़ा को निलंबित कर दिया जाता है फिर यह सजा तब तक निलंबित रहती है जब तक अपील पर अदालत अपना अंतिम निर्णय नहीं दिए देती है। अंतिम निर्णय में भी यदि अपीलार्थी दोषी पाया जाता है तो अपील अदालत सज़ा को बरकरार रखते हुए अपना निर्णय दिए देती है। सत्र न्यायालय से भी सज़ा बरकरार रहन...
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