पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री सिद्धार्थ बहुगुणा (भा.पु.से.) ने जबलपुर संस्कारधानी वासियों से अपील की है कि फैल रहे कोरोना वायरस के संक्रमण एवं वर्तमान परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुये कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये सावधानी बरतने की आवश्यकता है, कोरोना के संकमण की चेन को ब्रेक करने हेतु हर व्यक्ति का यह विशेष दायित्व है कि कोरोना प्रोटाकाॅल का सख्ती से पालन करते हुये जरूरी कार्य होने पर ही घर से बाहर निकलें, बच्चों और बुजुर्गो को अनावश्यक घर से बाहर न जाने दें, जब भी घर से बाहर निकलें मास्क अनिवार्य रूप से लगाये, फिजिकल डिस्टेंस दो गज की दूरी के नियम का कडाई से पालन करें, भीड का हिस्सा न बनें, समय समय पर हाथ को साबुन पानी से धोयें एवं सैनेटाईज करें, सर्दी, खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ होने जैसे लक्ष्ण होने पर निकटतम फीवर क्लीनिक में जाकर जांच करायें।
चेक बाउंस केस में सज़ा होने पर क्या किया जाए ……..? चेक बाउंस के केस में निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट ,1881 की धारा 138 के अंतर्गत 2 वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है। लेकिन यह इस अपराध में अधिकतम सज़ा है , अदालत साधारणतः से 6 MONTH या फिर 7 YEAR तक का कारावास देती है इसके साथ ही अभियुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 357 के अंतर्गत परिवादी को प्रतिकर दिए जाने हेतु भी निर्देशित किया जाता है। यह प्रतिकर चेक राशि का दुगना भी हो सकता है। सज़ा होने पर अभियुक्त ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपील अवधि तक सज़ा को निलंबित किये जाने हेतु दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 389(3) के अंतर्गत एक आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकता है। किसी भी जमानती अपराध में जमानत लेना अभियुक्त का अधिकार होता है इसलिए इस अपराध के अंतर्गत अभियुक्त को दी गई सज़ा को निलंबित कर दिया जाता है फिर यह सजा तब तक निलंबित रहती है जब तक अपील पर अदालत अपना अंतिम निर्णय नहीं दिए देती है। अंतिम निर्णय में भी यदि अपीलार्थी दोषी पाया जाता है तो अपील अदालत सज़ा को बरकरार रखते हुए अपना निर्णय दिए देती है। सत्र न्यायालय से भी सज़ा बरकरार रहन...
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