न्यायमूर्ति nv रमाना ने उस बेंच का नेतृत्व किया, जिसने अगस्त 2019 में अपनी विशेष स्थिति को समाप्त करने के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर में लगाए गए इंटरनेट पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की।
पीठ ने अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ मामले में 10 जनवरी, 2020 को दिए गए फैसले में कहा कि इंटरनेट पर बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यापार करने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। न्यायमूर्ति रमाना ने आनुपातिकता के सिद्धांतों को बहाल करते हुए कहा कि इंटरनेट का निलंबन अनिश्चित काल के लिए नहीं किया जा सकता है। निर्णय में कहा कि अधिकारियों के पास intenet निलंबन आदेशों को कारण के साथ सार्वजनिक करने का दायित्व है।
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