शहडोल। कलेक्ट्रेट कार्यालय के विराट सभागार में जिले में कोरोना संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने हेतु जिला आपदा प्रबंधन समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ सतेन्द्र सिंह एवं पुलिस अधीक्षक अवधेश गोस्वामी की उपस्थित में कोरोना संक्रमण रोकने के प्रयासों पर कहा कि मेडिकल कॉलेज में आईसीयू-2 की शुरूआत की जा रही है। इसी प्रकार एसईसीएल धनपुरी में 85 बिस्तरीय कोविड केयर सेंटर, स्थानीय स्तर पर श्री राम अस्पताल 25 बिस्तरीय, श्याम केयर अस्पताल में 10 बिस्तरीय एवं देवांता अस्पताल में 25 बिस्तरीय कोविड केयर सेंटर संचालित किए गए है। रिलांयस द्वारा जैतपुर एवं स्थानीय पाण्डव नगर में स्थापित कस्तूरबा गांधी कन्या छात्रावास में 50 बिस्तरीय कोविड केयर सेंटर भी शुरू किया जा रहा है। बैठक में कलेक्टर ने अवगत कराया कि जिला अस्पताल में एयर स्प्रेशन यूनिट एवं मेडिकल कॉलेज में भी एक एयर स्प्रेशन यूनिट स्थापित की जा रही है, जिससे जिले में 200 सिलेण्डर प्रतिदिन भर सकेंगे और ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेंगी।
चेक बाउंस केस में सज़ा होने पर क्या किया जाए ……..? चेक बाउंस के केस में निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट ,1881 की धारा 138 के अंतर्गत 2 वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है। लेकिन यह इस अपराध में अधिकतम सज़ा है , अदालत साधारणतः से 6 MONTH या फिर 7 YEAR तक का कारावास देती है इसके साथ ही अभियुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 357 के अंतर्गत परिवादी को प्रतिकर दिए जाने हेतु भी निर्देशित किया जाता है। यह प्रतिकर चेक राशि का दुगना भी हो सकता है। सज़ा होने पर अभियुक्त ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपील अवधि तक सज़ा को निलंबित किये जाने हेतु दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 389(3) के अंतर्गत एक आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकता है। किसी भी जमानती अपराध में जमानत लेना अभियुक्त का अधिकार होता है इसलिए इस अपराध के अंतर्गत अभियुक्त को दी गई सज़ा को निलंबित कर दिया जाता है फिर यह सजा तब तक निलंबित रहती है जब तक अपील पर अदालत अपना अंतिम निर्णय नहीं दिए देती है। अंतिम निर्णय में भी यदि अपीलार्थी दोषी पाया जाता है तो अपील अदालत सज़ा को बरकरार रखते हुए अपना निर्णय दिए देती है। सत्र न्यायालय से भी सज़ा बरकरार रहन...
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