थाना गोरा बाजार में आरोपी विकास घोसी पिता ओमकार घोसी उम्र 20 साल निवासी भूरी बाई बगीचा गोरा बाजार के द्वारा अपनी दूध की दुकान के पीछे आइसक्रीम एवं कोल्डिंग की दुकान चला रहा था जिसे रेड कर जिला दंडाधिकारी जबलपुर के निषेधाज्ञा का उल्लंघन करना पाए जाने से दुकान को सील कर धारा 186 भारतीय दंड विधान एवं आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 26 के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध कर धारा 151 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत से कार्रवाई की गई ।
चेक बाउंस केस में सज़ा होने पर क्या किया जाए ……..? चेक बाउंस के केस में निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट ,1881 की धारा 138 के अंतर्गत 2 वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है। लेकिन यह इस अपराध में अधिकतम सज़ा है , अदालत साधारणतः से 6 MONTH या फिर 7 YEAR तक का कारावास देती है इसके साथ ही अभियुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 357 के अंतर्गत परिवादी को प्रतिकर दिए जाने हेतु भी निर्देशित किया जाता है। यह प्रतिकर चेक राशि का दुगना भी हो सकता है। सज़ा होने पर अभियुक्त ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपील अवधि तक सज़ा को निलंबित किये जाने हेतु दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 389(3) के अंतर्गत एक आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकता है। किसी भी जमानती अपराध में जमानत लेना अभियुक्त का अधिकार होता है इसलिए इस अपराध के अंतर्गत अभियुक्त को दी गई सज़ा को निलंबित कर दिया जाता है फिर यह सजा तब तक निलंबित रहती है जब तक अपील पर अदालत अपना अंतिम निर्णय नहीं दिए देती है। अंतिम निर्णय में भी यदि अपीलार्थी दोषी पाया जाता है तो अपील अदालत सज़ा को बरकरार रखते हुए अपना निर्णय दिए देती है। सत्र न्यायालय से भी सज़ा बरकरार रहन...
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