उत्तर प्रदेश में कोरोना महामारी के कहर को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित प्रदेश के पांच बड़े शहरों- लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज और वाराणसी में कंप्लीट लॉकडाउन लगाने का आदेश दिया है। आदेश के मुताबिक, सोमवार रात से ही लॉकडाउन प्रभावी हो जाएगा। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से प्रदेश में 15 दिनों के लॉकडाउन पर विचार करने के लिए कहा है। बता दें कि उत्तर प्रदेश में महामारी बेकाबू होने लगा है। राजधानी लखनऊ कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में से एक है। कोरोना के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सोमवार को योगी आदित्यनाथ सरकार को आदेश दिया है कि वह 26 अप्रैल तक कोरोना से प्रदेश के पांच सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, कानपुर और गोरखपुर में 26 अप्रैल तक सभी प्रतिष्ठानों को बंद करे।
चेक बाउंस केस में सज़ा होने पर क्या किया जाए ……..? चेक बाउंस के केस में निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट ,1881 की धारा 138 के अंतर्गत 2 वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है। लेकिन यह इस अपराध में अधिकतम सज़ा है , अदालत साधारणतः से 6 MONTH या फिर 7 YEAR तक का कारावास देती है इसके साथ ही अभियुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 357 के अंतर्गत परिवादी को प्रतिकर दिए जाने हेतु भी निर्देशित किया जाता है। यह प्रतिकर चेक राशि का दुगना भी हो सकता है। सज़ा होने पर अभियुक्त ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपील अवधि तक सज़ा को निलंबित किये जाने हेतु दंड प्रक्रिया संहिता (IPC) की धारा 389(3) के अंतर्गत एक आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकता है। किसी भी जमानती अपराध में जमानत लेना अभियुक्त का अधिकार होता है इसलिए इस अपराध के अंतर्गत अभियुक्त को दी गई सज़ा को निलंबित कर दिया जाता है फिर यह सजा तब तक निलंबित रहती है जब तक अपील पर अदालत अपना अंतिम निर्णय नहीं दिए देती है। अंतिम निर्णय में भी यदि अपीलार्थी दोषी पाया जाता है तो अपील अदालत सज़ा को बरकरार रखते हुए अपना निर्णय दिए देती है। सत्र न्यायालय से भी सज़ा बरकरार रहन...
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